Thursday, 6 October 2011

बेवजह की नेतागीरी

हमें अपनी कुछ और खामियों पर भी नज़र डालनी होगी। हमने अपनी बुनियादी मुश्किलात को दरकिनार कर दिया है। और वक्त गुजर रहा है बेवजह की बातों में। मिसाल के तौर पर मस्जिद और मदरसों में सियासत देखने को मिल जाएगी। हमने इमामों और उलेमाओं की क़दर करना छोड़ दिया है। हालात तो यहां तक पहुंच गए हैं जिन लोगों के घर में बच्चे और बीवी नहीं सुनते वो इमाम, मुअज़्ज़न और उलेमाओं  पर हुक्म चलाते नजर आते हैं। अकसर मस्जिद और मदरसों में गुटबाज़ी दिखना आम बात हो गई है। अरे भाई ये लोग मज़हब का काम कर रहे हैं। इन्हें करने दो। जिसको क़ुरान और हदीस की सही जानकारी न हो उसे मज़हब के काम में दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन मज़हब से दूर भी नहीं रहना चाहिए। सही मायने में हम लोगों ने दीन का दामन नहीं थामा है। भाई लोगो उलेमा हमारे रहनुमा हैं। उनकी इज़्ज़त करना हमारा फर्ज़ है। इसलिए बेवजह की बातों से दिमाग हटाकर सही दिशा में ध्यान लगाओ। हमें जरूरत है सियासी तंजीम पर काम करने की। हमें ज़रूरत है एक इंक़लाब की। हमको भागीदारी के लिए देश में एक आंदोलन खड़ा करना होगा। उसके लिए तहरीक चलाएं, मुसलमानों को जगाने का काम करें। इस पर हमारा वक्त खर्च होगा तो हो सकता है कि भागीदारी के पेड़ की जड़े मज़बूत होने लगें। ये भी मुमकिन है कि  पेड़, फल फूल गया तो फल हम खाएंगे। और तैयार होने में देर लगी तो हमारी नस्लों को फल ज़रूर मिल जाएगा। पहला काम है ज़मीन में पौधा लगाने का। बाद में उसे खाद और पानी देने का। इसके लिए हर गांव, मोहल्ले, क़स्बे, और शहरों में तंज़ीम कायम करनी होगी। जिसका मक़सद सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को संगठित करना हो।

Wednesday, 5 October 2011

चिप्स के पैकेट में जो E631 लिखा है वह दर असल सूअर की चर्बी है


" कमाल है ! शायद ही कोई भारतीय परिवार चिप्स आदि से बच पाया होगा!! मुझे तत्काल कुछ वर्षों पहले का वह समय या...द आने लगा जब MSG का पता चलने पर मैं हर स्टोर पर किसी खाद्य पदार्थ के पैकेट पर नज़रें गड़ा कर यह देखने लगा जाता था कि इसमे कहीं MSG तो नहीं। यह देख वहां का स्टाफ व्यंग्य भरी नज़रें लिए बताता था कि ये सस्ता है सर, ज़्यादा महंगा नहीं है! मै जब कहता कि कीमत नहीं देख रहा हूँ तो उनकी जिज्ञासा बढ़ती तब बताता कि यह क्या होता है। आजकल तो बड़े बड़े अक्षरों में खास तौर पर लिखा रहता है कि No MSG ऐसा ही कुछ वाकया ब्रुक बोंड की चाय-पत्ती के साथ हुआ था जिस पर पोस्ट लिखी थी मैंने कि किस तरह इतनी बड़ी कम्पनी लोगों को सरासर बेवकूफ बना रही है। बात हो रही E631 की। मैं दन्न से बाज़ार गया और Lays के पैकेट देखे कुछ नहीं दिखा। लेकिन मुझे याद आने लग पड़ा था कि इस तरह के कोड देखें हैं मैंने कुछ दिन पहले। शहर के दूसरे कोने वाल़े एक सुपर बाज़ार में भी कुछ नहीं दिखा तो स्टोर वालों से इस बारे में बात करने पर ज्ञात हुआ कि कुछ सप्ताह पहले आयातित चिप्स और बिस्किट लाए गए थे जो अब ख़त्म हो चुके। तब तक एक जिज्ञासु कर्मचारी कहीं से दो ऐसे पैकेट ले आया जिन्हें चूहों द्वारा कुतरे जाने पर अलग रख दिया गया था। उन में इस तरह के कोड थे जिस में वाकई 631 लिखा हुआ है अब मैंने गूगल की शरण ली तो पता चला कि कुछ अरसे पहले यह हंगामा पाकिस्तान में हुआ था जिस पर ढेरों आरोप और सफाइयां दस्तावेजों सहित मौजूद हैं । हैरत की बात यह दिखी कि इस पदार्थ को कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है किन्तु अपने देश में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा। मूल तौर पर यह पदार्थ सूअर और मछली की चर्बी से प्राप्त होता है और ज्यादातर नूडल्स, चिप्स में स्वाद बढाने के लिए किया जाता है। रसायन शास्त्र में इसे Disodium Inosinate कहा जाता है जिसका सूत्र है C10H11N4Na2O8P1 होता यह है कि अधिकतर (ठंडे) पश्चिमी देशों मेंसूअर का मांस बहुत पसंद किया जाता है। वहाँ तो बाकायदा इसके लिए हजारों की तादाद में सूअर फार्म हैं। सूअर ही ऐसा प्राणी है जिसमे सभी जानवरों से अधिक चर्बी होती है। दिक्कत यह है कि चर्बी से बचते हैं लोग। तो फिर इस बेकार चर्बी का क्या किया जाए? पहले तो इसे जला दिया जाता था लेकिन फिर दिमाग दौड़ा कर इसका उपयोग साबुन वगैरह में किया गया और यह हिट रहा। फिर तो इसका व्यापारिक जाल बन गया और तरह तरह के उपयोग होने लगे। नाम दिया गया 'पिग फैट' 1857 का वर्ष तो याद होगा आपको? उस समयकाल में बंदूकों की गोलियां पश्चिमी देशों से भारतीय उपमहाद्वीप में समुद्री राह से भेजी जाती थीं और उस महीनों लम्बे सफ़र में समुद्री आबोहवा से गोलियां खराब हो जाती थीं। तब उन पर सूअर चर्बी की परत चढ़ा कर भेजा जाने लगा। लेकिन गोलियां भरने के पहले उस परत को दांतों से काट कर अलग किया जाना होता था। यह तथ्य सामने आते ही जो क्रोध फैला उसकी परिणिति 1857 की क्रांति में हुई बताई जाती है। इससे परेशान हो अब इसे नाम दिया गया 'ऐनिमल फैट' ! मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींद उड़ गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अब गुप्त संकेतो वाली भाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनम हुआ E कोड का तब से यह E631 पदार्थ कई चीजों में उपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी- विटामिन की गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को इस E631 पदार्थ मिश्रित सामग्री को उपयोग नहीं करने की सलाह है लेकिन कम्पनियाँ कहती हैं कि इसकी कम मात्रा होने से कुछ नहीं होता। पिछले वर्ष खुशदीप सहगल जी ने एक पोस्ट में बताया था कि कुरकुरे में प्लास्टिक होने की खबर है चाहें तो एक दो टुकड़ों को जला कर देख लें। मैंने वैसा किया और पिघलते टपकते कुरकुरे को देख हैरान हो गया। अब लग रहा कि कहीं वह चर्बी का प्रभाव तो नहीं था!? अब बताया तो यही जा रहा है कि जहां भी किसी पदार्थ पर लिखा दिखे E100, E110, E120, E 140, E141, E153, E210, E213, E214, E216, E234, E252,E270, E280, E325, E326, E327, E334, E335, E336, E337, E422, E430, E431, E432, E433, E434, E435, E436, E440, E470, E471, E472, E473, E474, E475,E476, E477, E478, E481, E482, E483, E491, E492, E493, E494, E495, E542,E570, E572, E631, E635, E904 समझ लीजिए कि उसमे सूअर की चर्बी  है !

असली खतरा कौन ?

ईराक युद्ध अब लगभग समाप्त हो चुका है (अमेरिका के लिये) और अमेरिका और उसकी कम्पनियों ने वहाँ पर अपना शिकंजा कस लिया है । जिस बहाने को लेकर ईराक पर हमला किया गया था, अब अमेरिका / ब्रिटेन का सफ़ेद झूठ सिद्ध हो चुका है, क्योंकि जिन व्यापक विनाश के हथियारों का ढोल पीटा गया था, वे कहीं नहीं मिले, जैसा कि हथियार निरीक्षक हैन्स ब्लिक्स पहले ही कह चुके थे । अब अमेरिका का अगला निशाना बनने जा रहा है ईरान, इस सूरतेहाल में कुछ प्रश्नों पर विचार करें, जिनके उत्तर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टों, समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों से लिये गये हैं -
प्रश्न - विश्व की आबादी में अमेरिका का प्रतिशत कितना है ?
उ. - छः प्रतिशत
प्रश्न - विश्व की कुल सम्पत्ति में अमेरिका के पास कितना है ?
उ. - लगभग पचास प्रतिशत
प्र. - किस देश के पास सबसे बडा तेल भंडार है ?
उ.- सऊदी अरब के पास (जो अमेरिका के इशारों पर नाचता है)
प्र. - किस देश के पास दूसरा सबसे बडा तेल भण्डार है ?
उ.- ईराक
प्र. - द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, तमाम युद्धों मे कितने लोग मारे जा चुके हैं ?
उ. - लगभग नौ करोड़
प्र. - ईराक के पास रासायनिक और जैविक हथियार कब से हैं ?
उ.- १९८० के पहले से ही
प्र. - क्या ये सारे हथियार ईराक ने स्वयं ही निर्माण कर लिये ?
उ. - नहीं.. इसके लिये सहायता, सामान और तकनीक अमेरिका और ब्रिटेन ने दी थी (इसीलिये वे दावे से कहते थे कि इराक के पास ये हथियार हैं)
प्र. - ईरान के खिलाफ़ युद्ध में इराक ने गैस का उपयोग किया, अमेरिका ने कभी आलोचना की ?
उ.- नहीं
प्र.-सद्दाम हुसैन ने कुर्दिश शहर हलबजा में १९८८ मे कितने लोगों को गैस से मारा था ?
उ.- लगभग ५०००
प्र.- उस वक्त कितने पश्चिमी देशों ने इसकी आलोचना की ?
उ. - एक ने भी नहीं
प्र.- वियतनाम युद्ध में अमेरिका ने कितने गैलन "एजेण्ट ऑरेंज" (एक रासायनिक हथियार) का उपयोग किया ?
उ.- लगभग १.७ करोड गैलन
प्र.- ९/११ की घटना का सद्दाम हुसैन से कोई सीधा सम्बन्ध है ?
उ.- नहीं
प्र.- 1991 के खाडी युद्ध मे कितने इराकी नागरिक मारे गये ?
उ.- लगभग 35,000
प्र.- यूएन के अनुसार 1991 से 1994 के बीच इराक में कैन्सर के रोगियों में कितनी वृद्धि हुई ?
उ.- लगभग 700%
प्र.- 1991 के खाडी युद्ध में अमेरिका ने इराक की कितनी सैन्य क्षमता समाप्त कर दी थी ?
उ.- लगभग अस्सी प्रतिशत
प्र.- कितने वर्षों तक अमेरिका ने इराक पर वायु हमले (उडान वर्जित क्षेत्र के नाम पर) जारी रखे ?
उ.- 11 वर्षों तक
प्र.- 1989 से पहले इराक में बच्चों की मृत्यु दर क्या थी ?
उ.- 38
प्र.- दस साल बाद 1999 में इराक में बच्चों की मृत्यु दर क्या थी ?
उ.- 131 (अर्थात 345 % की बढोतरी)
प्र.- बारह वर्षों के प्रतिबन्ध झेलने के दौरान कितने इराकियों की दवा के अभाव में मृत्यु हुई ?
उ.- 1.5 करोड़
प्र. - क्या सद्दाम ने कभी हथियार निरीक्षकों को इराक से भगाया ?
उ.- नहीं
प्र.- अब तक कितनी बार इराक में हथियार निरीक्षण हुआ ?
उ.- 300 बार
प्र.- 1992 से अब तक इसराईल ने कितने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन किया है ?
उ.- 65 से ज्यादा बार
प्र.- 1972 से 1990 के बीच अमेरिका ने कितनी बार इसराइल विरोधी प्रस्तावों को वीटो कर दिया ?
उ.- 30 से ज्यादा बार
प्र.- कितने देशों के पास ज्ञात रूप से परमाणु हथियार हैं ?
उ.- आठ देशों के पास
प्र.- अमेरिका के पास कितने परमाणु हथियार हैं ?
उ.- 10,000 से ज्यादा
प्र.- किस एकमात्र देश ने अब तक परमाणु हथियारों का उपयोग किया ?
उ.- अमेरिका ने (उसमें भी मासूम बच्चे और नागरिक ही मारे गये थे)
प्र.- क्या इसराइल ने कभी हथियार निरीक्षकों को अपने यहाँ आने दिया है ?
उ.- कभी नहीं
प्र.- अन्तिम और सबसे बडा सवाल - विश्व शांति के लिये ईरान, उत्तर कोरिया और अमेरिका में से कौन सबसे बडा खतरा है
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